कोरिया टाईम्स | ब्यूरो चीफ: गुलशन यादव
रघुवर यादव ने सवाल उठाया कि क्या निर्माताओं के पास कोई अन्य नाम नहीं था, या फिर जानबूझकर विवाद उत्पन्न कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि इस तरह के शीर्षक से एक समाज को टारगेट किया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी फिल्म, गीत या रचना जो किसी जाति, धर्म-संप्रदाय, देवी-देवताओं या महापुरुषों का अपमान करती हो, उसका पुरज़ोर विरोध किया जाएगा। साथ ही देशवासियों से अपील की कि समाज की गरिमा के खिलाफ बनाई गई किसी भी सामग्री का समर्थन न करें।
फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें फिल्म निर्माताओं के रुख और प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।